जगजीत जी और लता जी का एक रूमानियत भरा नगमा


ग़म का खज़ाना तेरा भी है मेरा भी  
ये नज़राना तेरा भी है मेरा भी

अपने ग़म को गीत बना कर गा लेना
राग पुराना तेरा भी है मेरा भी

तू मुझ को और मै तुझ को समझाऊं क्या  
दिल दीवाना तेरा भी है मेरा भी  

शहर में गलियों गलियों जिस का चर्चा है  
वो अफसाना तेरा भी है मेरा भी  

मयखाने की बात न कर वाईज़ मुझ से  
आना जाना तेरा भी है मेरा भी|
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