बेबस हैं...

दिन-- रात के सामने।
खुशी-- ग़म के सामने।
ग़म-- खुशी के सामने।
कल-- आज के सामने।
आंख--आंसू के सामने।
दिल--दिमाग के सामने।
इन्सान--कुदरत के सामने।
नफरत-- मुहब्बत के सामने।
जाहिल-- आलिम के सामने।
और
ज़िन्दगी-- आरज़ू के सामने।

1 टिप्पणियाँ:

JHAROKHA ने कहा…

bahut achchhee kavitayen hain ..achchhe vichar...likhte rahen.shubhkamnayen.

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