कहाँ तलाशूँ तुझे मैं तुम्हें आरज़ू -presented by Saleem Khan

दूर तलक गूंजते हैं यहाँ सन्नाटे रात भर
दिन के शोर ओ शराबे में भी होता हूँ मैं तन्हाँ!
दिल की आवाज़ भी सुन लो, सुन लो मेरी आरज़ू
कहाँ तलाशूँ तुझे मैं, तुम हो कहाँ, मैं हूँ कहाँ?

2 टिप्पणियाँ:

aleem azmi ने कहा…

MashaAllah saleem bhai kya kahne apke .....bahut umda

aapki har shayri mein ek alag andaaj hai... pure blog ko padh gaya.... maja aa gaya...

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