जब किसी से कोई गिला रखना, सामने अपने आईना रखना; Nida Fazli



जब किसी से कोई गिला रखना
सामने अपने आईना रखना

यूं उजालों से वास्ता रखना



शम्मा के पास ही हवा खना


घर की तामीर चाहे जैसी हो
इसमें रोने की कुछ जगह रखना

1 टिप्पणियाँ:

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर्…………हर शेर उम्दा।

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